DNS क्या है और DNS कैसे काम करता है? जाने सभी महत्वपूर्ण बातें 2019 ।

Hello Everyone , Smartnewsbazar.com में आप सभी का बहत बहत स्वागत है। आज हम जानेंगे DNS क्या है ? और डंस कैसे काम करता है ? आज का युग Technology का युग है। हमारा जीवन पूरी तरह से Technology के चारों ओर घूम रहा है और यह हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। इस युग की सबसे महत्वपूर्ण खोजों में से एक Internet है। आज के समय में, हम Internet के बिना हमारे जीवन की कल्पना नहीं कर सकते हैं। हम छोटी और बड़ी चीजों के लिए internet पर निर्भर हो चुके हैं।

 

DNS kya hai

Internet पर हम मनोरंजन से लेकर काम काज को भी अंजाम देते है। Mobile, Computer खोलते ही हम इन पर internet के द्वारा अनगिनत website पर जाते हैं। और अपने काम को अंजाम देते हैं। हम इतने महत्वपूर्ण काम internet पर करते हैं लेकिन क्या कभी आपने सोचा है की आखिर यह काम कैसे करता है? हम जिस भी website पर जाना चाहते हैं, internet हमें बड़ी आसानी से पहुँचा देता है। आखिर यह होता कैसे है?

अगर ऐसे सवाल आपके मन में भी आ रहे हैं तो चलिए इस article के माध्यम से इसे आपको समझाने की कोशिश करते हैं। दरअसल internet पर जो भी website के माध्यम से हम काम करते हैं वह सभी एक system के द्वारा संपन्न होता है। इसे हम DNS कहते हैं।

DNS क्या है?

जैसा के हम सभी जानते हैं की computer केवल 2  ही number को समझते हुए, उसी आधार पर काम करता है। यह नंबर 0 और 1 है। DNS यानी Domain Name System भी कुछ ऐसी ही व्यवस्था है जो की numbers पर आधारित है। DNS की बात करें तो जैसा की इसके नाम से भी झलकता है की यह Domain यानी website के name का एक system है।

DNS को विस्तार से हम इस प्रकार समझ सकते हैं की DNS ही internet का आधार है। जब भी हम internet पर किसी website को डालते हैं तो हम उसे अधिक्तर english के alphabet में डालते हैं। जैसे की अगर हमें Smart News Bazar के website पर जाना है तो हम internet पर www.smartnewsbazar.com type करते हैं। जब हम यह search करते  हैं तो यह internet  पर डालते ही एक खास number तक पहुँच जाता है। जिसे IP address कहते हैं। वह IP address ही होता है जो की हमें मनचाहे website पर पहुंचाता है और उस website पर उपलब्ध जानकारी हम तक पहुंचाता है। 

इसे दूसरे तरीके से ऐसे समझ सकते हैं की DNS एक ऐसा system है जो की नाम को number में बदलता है। वास्तव में internet number की भाषा समझता है इसलिए सभी website एक number यानी IP address के format में होता है। जब किसी website को internet पर डालते हैं तो वह DNS के माध्यम से इसे निर्धारित जगह पर पहुंचा देता है । क्यों की number की अपेक्षा name  को याद रखना काफी आसान है इएसलिये DNS को name और number  के बीच की करी कह सकते हैं। DNS को internet का phone book  भी कहा जाता है। जिस तरह हम अपने mobile में किसी खास व्यक्ति का number नाम से save करते हैं। ठीक उसी तरह DNS में website number में दर्ज होता है जिसे अलग अलग website के नाम से save किया रहता है।

DNS काम कैसे करता है?

DNS समझने के बाद सवाल आता है की आखिर यह काम कैसे करता है? तो  बता दें DNS कई चरणों में काम करता है।

सभी website अलग अलग server से जुड़ा होता है। इन servers में ही यह website IP address  के रूप में जमा रहता है। जब कोई व्यकि अपने internet system पर किसी website को ढूंढता है तो वह system उस website से जुड़ी जानकारी को Local  Cache  Server  में खोजता है। जब उससे जुड़ी जानकारी यहां नह मिलती है तो यह डाले गए website के DNS के लिए LAN यानी Local AreaNetwork में खोजने लगता है। अगर उससे जुड़ी जानकारी LAN सर्वर के पास उपलब्ध रहता है तो वहीं से वह जानकारी Local Cache के माध्यम से system में चला जाता है।

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इसके अलावा और विस्तार से समझें तो इसे इस प्रकार समझा जा सकता है। जब हम किसी website को खोजते हैं यानी की internet पर search  करते हैं तो वह 4 विभिन्न चरणों के बाद ही उससे संबन्धित जुड़ी जानकारी उपलब्ध करवाती है अर्थात वह webpage load  होता है।

एक webpage के load होने के लिए 4 DNS Server की ज़रूरत होती है यानी की 4 server  इसमें भाग लेता है।

DNS Recursor

DNS Recursor – DNS Recursor DNS का सबसे पहला चरण होता है। जब हम mobile या computer  के माध्यम से internet पर किसी को website search करते हैं तो इसे सबसे पहला चरण यानी DNS Recursor कहा गया है। internet पर हम जानकारी किसी browser  जैसे की google crome, firefox, uc browser इत्यादि पर खोजते हैं। ये ही DNS Recursor है। यहीं से किसी website के load होने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।

Root Nameserver

Root Nameserver –  Root NameServer किसी website को IP address में बदलने का सबसे पहला चरण है। जब किसी website को internet  पर खोजते हैं तो यह उस websites को IP address के रूप में बदलने लगता है। यहां से ही उस website से जुड़ी जानकारी खोजे जाने की शुरुआत होती है।


TLD Nameserver

TLD Nameserver – TLD ( Top Level Domain ) Root Name Server के बाद अपना काम शुरू करता है। यह खोजे गए website के IP address के search  में अगला पड़ाव  होता है। यह एक खास प्रकार का server होता है जहां website के अंत में लगे अक्षर जैसे की in, com, org, gov इत्यादि के आधार पर IP Address  खोजी जाती है। अगर किसी website के अंत में “.com” लगा हुआ है तो यह server .com वाले section में जानकारी भेज देता है।

Authoritative Nameserver

Authoritative Nameserver – Website के अंत में लगे .com, .in, .org इत्यादि के आधार पर जब TLD द्वारा आवेदन आग बढ़ाई जाती है तो यह Authoritative Nameserver तक आता है। यहां पर Search किये गए website का IP address  उपलब्ध करा दिया जाता है। यहां से IP address  के आधार पर उपलब्ध जानकारी  वापस सबसे पहले चरण तक आ जाता है। इस तरह एक website load हो कर जानकारी दिखाता है।

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